सेक्सुअल हैरासमेंट के खिलाफ एम जे अकबर पर जांच नही होगी
बीते पिछले दो हफ़्तों में मी टू मूवमेंट एक ऐसा मूवमेंट जिसने भारत के हर गलियारें में एक भूचाल ला दिया है । ऐसा कैंपेन जिसके द्वारा महिलाएं सोशल मीडिया पर आकर साथी और वरिष्ठ सहकर्मियों के हाथ अपने सेक्शुअल हैरसमेंट की घटनाओं का जिक्र कर रही है । मी टू कैंपेन पर ऐसे घटनाओ का जिक्र हो रहा है जो घटनाएं कई साल पहले की हैं । इस प्रकार की शिकायतें प्राइवेट सेक्टर में भी देखने को मिल रही है । इस प्रकार के मामलों के खिलाफ संज्ञान लेते हुए पॉश के तहत आरोपित पुरुष कर्मियों के खिलाफ जांच शुरू कर चुके हैं । गौरतलब है कि पॉश के नियम के मुताबिक इस प्रकार के घटनाक्रम होने से लगभग छः महीने तक की घटनाओं के बारे में तीन महीने के भीतर ही शिकायत की जा सकती है।
भारत के विदेश राज्य मंत्री एम जे अकबर के मामले को लेकर विदेश मंत्रालय की इंटनरल कंप्लेंट्स कमिटी ऑन प्रिवेंशन ऑफ सेक्शुअल हैरसमेंट पर कार्यवाही करने से हाथ खड़े कर दिए है । गौरतलब है कि पॉश सेल की मेंबर एडवोकेट अपर्णा भट्ट ने कहा है कि विदेश मंत्रालय (MEA) की एमजे अकबर के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच शुरू नहीं कर पाएगी । अपर्णा भट्ट आई सी सी सेल चार सदस्यों की कमिटी का हिस्सा हैं जिन पर मिनिस्ट्री में सेक्शुअल हैरसमेंट की शिकायतों की जांच करने की जिम्मेदारी है ।
ग़ौरतलब है कि विदेश विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर पर कई महिलाओं ने आरोप लगाया है । उन्होंने आरोप लगाया है कि एम जे अकबर ने उनके साथ व्यभिचार किया है जब वो उनके सानिध्य में काम कर रही थी । गौरतलब है कि एम जे अकबर डेली न्यूजपेपर टेलीग्राफ और एशियन एज के फाउंडर और एडिटर रहे है । इन्होंने अपने ऊपर लगे आरोप जो कि प्रिया रमानी ने लगाए है उनके खिलाफ एम जे अकबर ने मानहानि का केस दर्ज कर दिया हैं ।
मी टू मूवमेंट के वजह से एम जे अकबर पर लगे आरोप को लेकर भारतीय जनता पार्टी काफी सख्त दिखाई दे रही है । विपक्ष पार्टियां एम जे अकबर के खिलाफ जाँच की माँग करते हुए उनका इस्तीफा माँग रही है ।

